दीपक वर्मा - कुनकुरी
लोकेशन - फरसाबहार
24/02/2026
*जशपुर जिले में अवैध बंगला भट्ठों पर मेहरबानी या मिलीभगत—अधिकारियों के तर्क ने खड़े किए बड़े सवाल*
जशपुर/फरसाबहार -- जशपुर जिले में लाल ईंट के कथित अवैध कारोबार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों से बिना वैधानिक अनुमति संचालित हो रहे बंगला ईंट भट्ठों पर कार्रवाई के बजाय औपचारिकता निभाने के आरोप लग रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि “VIP” ब्रांड की आड़ में खुलेआम बिक रही ईंटों के पीछे असली आका कौन हैं—यह सवाल अब जनता की जुबान पर है।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, “VIP” नाम की मुहर लगाकर लाल ईंटों की धड़ल्ले से बिक्री की जा रही है, जबकि पंचायत एवं ग्राम सभा की अनुमति के बिना व्यावसायिक संचालन नियमों का खुला उल्लंघन है। ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों का कहना है कि उनके अभिलेखों में ऐसे किसी भी बंगला ईंट भट्ठे को वैध स्वीकृति नहीं दी गई है। इसके बावजूद वर्षों से संचालन जारी रहना, कथित संरक्षण या मिलीभगत की आशंका को और गहरा करता है।
अधिकारियों का तर्क या अवैधता को ढाल?
सूत्र बताते हैं कि जब जिम्मेदार विभागों से कार्रवाई को लेकर सवाल किए जाते हैं, तो जवाब मिलता है—यदि बंगला ईंट भट्ठे बंद हुए, तो निर्माण कार्य ठप पड़ जाएगा और चिमनी ईंट निर्माता दाम बढ़ा देंगे। यही नहीं, ईंटों की कीमतें आसमान छूने का हवाला देकर कार्रवाई टाल दी जाती है। सवाल यह है कि क्या किसी अवैध गतिविधि को सिर्फ बाजार संतुलन के नाम पर जारी रहने दिया जा सकता है?
कोयले का अवैध भंडारण और पर्यावरणीय खतरा
जानकारों के मुताबिक, क्षेत्र में कोयले के अवैध भंडारण की सूचनाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बिना नियामक नियंत्रण के चल रहे भट्ठे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं, लेकिन दबाव और भय के कारण लोग खुलकर सामने नहीं आ पा रहे।
जांच के नाम पर चालान, कार्रवाई नदारद
स्थानीय नागरिकों का दावा है कि विभागीय दौरे हर साल होते हैं, मगर कार्रवाई चालान तक सिमट जाती है। यदि गतिविधियां अवैध हैं, तो केवल आर्थिक दंड लगाकर संचालन जारी रखना किस हद तक न्यायसंगत है—यह सवाल अब प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या संबंधित विभाग कथित अवैध बंगला ईंट भट्ठों पर ठोस और निर्णायक कार्रवाई करेंगे, या फिर “VIP” ईंट के साये में औपचारिकताओं का खेल यूं ही चलता रहेगा।