फरसाबहार कोर्ट में मारपीट मामला: वकीलों पर दर्ज FIR पर हाईकोर्ट की बड़ी रोक, कार्रवाई पर उठे सवाल
जशपुर | फरसाबहार | कुनकुरी
फरसाबहार न्यायालय परिसर में हुई मारपीट की घटना को लेकर दर्ज एफआईआर पर अब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अहम हस्तक्षेप करते हुए वकीलों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर और क्रिमिनल केस पर स्टे लगा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
कुछ दिन पूर्व फरसाबहार न्यायालय के अधिवक्ता कक्ष में तपकरा निवासी आयुष चौधरी के साथ विवाद के दौरान अधिवक्ता चुन्नू राम चौहान पर धारदार सूजा से हमला किया गया, जिसमें वे घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद आरोपी आयुष चौधरी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि तीन दिन बाद आयुष चौधरी ने ही फरसाबहार थाना में अधिवक्ताओं—कलेश जायसवाल, चुन्नू राम चौहान, शनेश्वर चौहान और ओमप्रकाश दास—के खिलाफ मारपीट व गाली-गलौज की रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने मात्र एक सप्ताह में जांच पूरी कर न्यायालय कुनकुरी में चालान भी पेश कर दिया।
हाईकोर्ट में याचिका, FIR पर स्टे
चारों अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री मनोज चौहान के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर में एफआईआर और क्रिमिनल केस को निरस्त करने हेतु याचिका दायर की।
दिनांक 19/02/2026 को हुई सुनवाई में न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह माना कि वकीलों के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट बचाव स्वरूप की गई प्रतीत होती है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एफआईआर व क्रिमिनल केस पर स्टे लगा दिया और थाना फरसाबहार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करने का आदेश भी दिया।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष का बयान
इस पूरे मामले पर कुनकुरी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री विष्णु कुलदीप ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा— “वकीलों पर धारदार हथियार से हमला हुआ, इसके बावजूद प्रशासन ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। उल्टा वकीलों पर ही केस दर्ज कर दिया गया। यह सब किसी न किसी के संरक्षण में हुआ है। हालांकि देश में न्यायालय है—और हमें भरोसा है। बहुत जल्द वकीलों पर हमले के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।”
सवालों के घेरे में कार्रवाई
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब फरसाबहार थाना की भूमिका और त्वरित चालान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले ने जिले के विधि जगत में हलचल मचा दी है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।