25-30 साल सेवा के बाद भी ‘शून्य’! छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षक बिना पेंशन रिटायर
“जीरो पेंशन” का दंश झेल रहे गुरुजन, सरकार से सम्मान जनक पेंशन की मांग तेज
छत्तीसगढ़ में दशकों तक शिक्षा विभाग को अपनी सेवाएं देने वाले हजारों शिक्षक आज सेवानिवृत्ति के बाद गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि 1998 और उसके बाद नियुक्त शिक्षक अब बड़ी संख्या में रिटायर हो रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि उन्हें ‘जीरो पेंशन’ (शून्य पेंशन) मिल रही है।
क्यों बन रही है ‘जीरो पेंशन’ की स्थिति?
10 साल की बाध्यता: नियम के अनुसार संविलियन के बाद 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर ही न्यूनतम पेंशन पात्रता बनती है।
पूर्व सेवा की अनदेखी:
2018 में संविलियन होने के कारण 2028 से पहले रिटायर होने वाले शिक्षक इस लाभ से वंचित हो रहे हैं।
आर्थिक संकट:
80-90 हजार रुपये तक अंतिम वेतन पाने वाले शिक्षक रिटायरमेंट के बाद अचानक आयविहीन हो जा रहे हैं, जिससे परिवार, स्वास्थ्य और सामाजिक सम्मान पर संकट खड़ा हो गया है।
न्यायालय का भी स्पष्ट मत
संजय शर्मा ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ ने भी कहा है कि संविलियन से पूर्व दी गई लंबी सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसके बावजूद शिक्षकों को उनका हक नहीं मिल रहा है।
जमीनी हकीकत:
दर्जनों शिक्षक ‘जीरो पेंशन’ के शिकार
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में—धमतरी, जशपुर,
बलौदाबाजार, बालोद, बस्तर, रायगढ़, कांकेर—से सामने आए उदाहरण चौंकाने वाले हैं।
25-30 साल सेवा देने वाले शिक्षक भी शून्य पेंशन पर रिटायर
कई मामलों में सिर्फ 1500 से 3500 रुपये तक की नगण्य NPS राशि
कुछ को ग्रेच्युटी तक नहीं मिली
ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षक आज अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में असुरक्षित हैं।
टीचर्स एसोसिएशन की प्रमुख मांग
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि: पूर्व सेवा अवधि को पेंशन योग्य सेवा में जोड़ा जाए।
न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जाए।
रिटायर हो रहे शिक्षकों के लिए सम्मानजनक पेंशन व्यवस्था लागू की जाए।
प्रदेश पदाधिकारियों में—अनिल रावत, एल.डी. बंजारा, सौरभ जयेश टोपनो और जशपुर जिलाध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव—ने भी कहा कि 25-30 वर्षों तक सेवा देने वाले गुरुजनों को “शून्य” पर छोड़ना अन्याय है।
“शिक्षक समाज का निर्माता होता है, लेकिन आज वही निर्माता सेवानिवृत्ति के बाद ‘शून्य’ पर खड़ा है।”
अब देखना यह होगा कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है और क्या इन शिक्षकों को उनका सम्मान और हक मिल पाता है या नहीं।