दोकड़ा में उमड़ा आस्था का महासागर: श्री जगन्नाथ मंदिर प्रथम वर्षगांठ महोत्सव का भव्य आगाज़, कलश यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल
दोकड़ा। ऐतिहासिक एवं प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में स्थापना के प्रथम वर्षगांठ महोत्सव 2026 का शुभारंभ गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन के पहले दिन निकली भव्य कलश यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय की उपस्थिति ने आयोजन को और विशेष बना दिया। हजारों महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा में सहभागिता कर पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।
कलश यात्रा का शुभारंभ शिव मंदिर से वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजा-अर्चना के साथ हुआ। श्रद्धालु सिर पर कलश धारण कर बस स्टैंड एवं नगर भ्रमण करते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। पूरे मार्ग में “हरे कृष्ण हरे राम” और “जय जगन्नाथ” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। मंदिर पहुंचने पर अधिवास एवं कलश स्थापना की धार्मिक रस्में विधि-विधान के साथ संपन्न कराई गईं।
महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार 15 मई को सुबह 8 बजे से अखंड हरि नाम कीर्तन महायज्ञ एवं नामाचार का आयोजन होगा। आयोजन समिति के अनुसार ओडिशा, झारखंड सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रसिद्ध भजन एवं कीर्तन मंडलियां संगीतमय प्रस्तुति देंगी, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति रस में डूब जाएगा। तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान प्रतिदिन विशाल भंडारा एवं महाप्रसाद वितरण भी किया जा रहा है। अंतिम दिन पूर्णाहुति, दीक्षाभंजन एवं नगर भ्रमण के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
आयोजन समिति के ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह एवं बलराम भगत ने बताया कि यह महोत्सव धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश दे रहा है। मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सजावट, पारंपरिक ओडिशा शैली की झांकियों और धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, बैठने और प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई है।
आस्था और इतिहास का संगम बना दोकड़ा का श्री जगन्नाथ मंदिर
दोकड़ा का श्री जगन्नाथ मंदिर अब केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक बन चुका है। मंदिर के भव्य स्वरूप की नींव मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने रखी थी।
दोकड़ा में भगवान जगन्नाथ की परंपरा वर्ष 1942 से चली आ रही है, जब पंडित स्वर्गीय सुदर्शन सतपथी महाराज एवं स्वर्गीय सुशीला सतपथी ने ऐतिहासिक रथ यात्रा की शुरुआत की थी। वर्ष 2019 में मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य की शुरुआत हुई और 25 मई 2025 को मंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई।
आज यह मंदिर न केवल धार्मिक केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का भी सशक्त प्रतीक बन चुका है।