LIC का ₹84 हजार और स्कूटी लेकर फरार हुआ कर्मचारी, दिल्ली - बेंगलुरु घूमकर लौटा... CCTV फुटेज ने खोला राज, कुनकुरी पुलिस ने आरोपी को धर दबोचा।
कुनकुरी - जशपुर जिले के कुनकुरी थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी और चोरी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है।
कुनकुरी थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव ने बताया कि LIC एजेंट एवं ठेकेदारी का कार्य करने वाले संजीव कुमार अम्बस्थ के यहां कार्यरत 18 वर्षीय कर्मचारी ""लक्ष्मीकांत यादव"" पिता फिरन यादव निवासी डुगडुगिया ने मालिक का भरोसा तोड़ते हुए LIC में जमा करने के लिए दिए गए 84,634 रुपये नकद और मेस्ट्रो स्कूटी (CG14MG-5976) लेकर फरार हो गया। चोरी की रकम से उसने दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों की सैर की, लेकिन आखिरकार कुनकुरी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को प्रार्थी संजीव कुमार अम्बस्थ ने अपने कर्मचारी लक्ष्मीकांत यादव निवासी डुगडुगिया को LIC कार्यालय में प्रीमियम जमा करने के लिए ₹84,634 नकद और अपनी स्कूटी देकर भेजा था। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब आरोपी वापस नहीं लौटा और फोन पर बहाने बनाने लगा, तब संदेह होने पर उसकी तलाश शुरू की गई। इसके बाद आरोपी मोबाइल बंद कर स्कूटी और नकदी लेकर फरार हो गया। जांच के दौरान आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह चोरी की स्कूटी को रायगढ़ रेलवे स्टेशन की पार्किंग में खड़ा कर ट्रेन से पहले रायपुर, फिर दिल्ली और उसके बाद बेंगलुरु चला गया। उसने LIC के जमा करने वाले पूरे पैसे घूमने-फिरने, खानपान और अन्य खर्चों में उड़ा दिए।
वारदात का सबसे दिलचस्प पहलू तब सामने आया जब आरोपी 13 मई 2026 को वापस रायगढ़ से स्कूटी लेकर प्रार्थी के घर पहुंचा। उसने स्कूटी घर के बाहर खड़ी की, चाबी घर के अंदर फेंकी और मौके से फरार हो गया। घर के बाहर लगे CCTV कैमरे में उसकी पूरी हरकत कैद हो गई, जिससे पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिला।
कुनकुरी पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) एवं 306 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की। लगातार तलाश के बाद 6 अगस्त 2026 को आरोपी लक्ष्मीकांत यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ₹1,000 नकद, LIC जमा करने की पर्ची तथा चोरी के पैसों से खरीदा गया एक लोअर भी जब्त किया है।
कुनकुरी पुलिस की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से बचने की कोशिश करे, कानून के हाथ से नहीं बच सकता।
प्रकरण में आरोपी की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव के निर्देश पर प्रधान आरक्षक ढलेश्वर यादव, चंद्रशेखर बंजारे एवं नंदलाल यादव की अहम भूमिका रही।