बोर्ड परीक्षा में अच्छा परिणाम हेतु 9 वीं में प्रवेश परीक्षा से हो दाखिला
नियम बनाने शिक्षा विभाग को टीचर्स एसोसिएशन ने दिया ज्ञापन
कमजोर छात्रों के लिए जिला/ब्लॉक में खुले आवासीय उपचारात्मक स्कूल
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने सचिव स्कूल शिक्षा विभाग व संचालक लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ को पत्र लिखकर बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम हेतु 9 वीं कक्षा में 'प्रवेश परीक्षा' आयोजित करने एवं न्यूनतम उपस्थिति के संबन्ध में नियम बनाने की मांग की है।
10 वीं व 12 वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम बेहतर हो इसके लिए युक्तिसंगत व कक्षागत ज्ञान के छात्रों को ही प्रवेश दिया जावे, अभी तक ड्रापआउट रोकने के लिए कक्षा 8 वीं के समस्त छात्रों का कक्षा 9 वीं में प्रवेश होता है, जिससे 10 वीं/12 वीं बोर्ड का परिणाम उच्चतर नही आ पाता है, अतः किसी विद्यालय का अगर बोर्ड परीक्षा परिणाम का प्रतिशत ही पैमाना है तो शैक्षणिक व्यवस्था में जो मात्रात्मक प्रवेश है उसे गुणात्मक सुधार और बोर्ड परीक्षाओं के बेहतर परीक्षा परिणाम हेतु शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन स्तर पर कुछ कड़े कदम उठाया जाना आवश्यक प्रतीत होता है।
इस हेतु निम्नलिखित सुझाव को सत्र 2026-27 से लागू किया जावे-
-
कक्षा 9 वीं में प्रवेश हेतु "प्रवेश परीक्षा का आयोजन - वर्तमान में कक्षा 9 वीं में बिना किसी मापदंड के प्रवेश दिए जाने के कारण शैक्षणिक स्तर में गिरावट देखा जा रहा है यदि प्रवेश के समय एक "प्रवेश परीक्षा" (Entrance Exam) आयोजित की जाए, तो केवल वे ही विद्यार्थी प्रवेश पा सकेंगे जो शैक्षणिक रूप से सक्षम होंगे इससे कक्षा में प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा जिससे शिक्षकों को औसत से ऊपर के विद्यार्थियों को पढ़ाने और बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार करने में सुगमता होगी।
-
पोषित शाला- पोषित शाला से प्राप्त TC टीसी के आधार पर प्रवेश अनिवार्य न किया जावे, इस प्रक्रिया से 8 वीं तक अनुतीर्ण प्रणाली नही होने के कारण कमजोर छात्रों का भी 9 वीं कक्षा में प्रवेश होता है।
-
उपस्थिति के कड़े मानदंड - यह देखा गया है कि कक्षा 8 वीं में नियमित विद्यालय न आने वाले विद्यार्थी का भी सीधे कक्षा 9 वीं में प्रवेश हो जाता है, कक्षा स्तर के ज्ञान के बिना छात्र हाई स्कूल में पहुंचते है जिससे उनकी बुनियादी समझ अधूरी रह जाती है अतः कक्षा 8 वीं में न्यूनतम 75% उपस्थिति अनिवार्य की जाए।
-
बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार - जब प्रवेश के स्तर पर ही छंटनी (Screening) की जाएगी, तो हाई स्कूल स्तर पर शिक्षकों को ऐसे विद्यार्थी प्राप्त होंगे जिनका आधार मजबूत होगा एवं कक्षा स्तर के ज्ञान होने से अंततः कक्षा 10 वीं एवं 12 वीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होगा और विद्यालय का शैक्षणिक स्तर ऊंचा उठेगा।
-
8 वीं कक्षा के कमजोर बच्चों को चिन्हांकित कर उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Coaching) प्रदान करने हेतु जिला एवं ब्लॉक मुख्यालय में स्पेशल उपचारात्मक स्कूल खोलकर अलग से शिक्षकों की व्यवस्था कर अध्यापन कराया जावे।
-
बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार - जब प्रवेश के स्तर पर ही छंटनी (Screening) की जाएगी, तो हाई स्कूल स्तर पर शिक्षकों को ऐसे विद्यार्थी प्राप्त होंगे जिनका आधार मजबूत होगा। इससे अंततः कक्षा 10 वीं एवं 12 वीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होगा और विद्यालय का शैक्षणिक स्तर ऊंचा उठेगा।
हाल ही में बालोद जिले के बोर्ड परीक्षा परिणामों के आधार पर कई स्कूलों के प्राचार्यों की वेतन वृद्धि रोकने एवं निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई की गई है इस निर्णय से जिले व राज्य के समस्त शैक्षणिक जगत में भय और असुरक्षा का वातावरण व्याप्त हो गया है।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने शासन का ध्यान निम्नलिखित व्यावहारिक बिंदुओं की ओर आकृष्ट किया है जो बोर्ड परीक्षा परिणाम को सीधे प्रभावित करते हैं-
विद्यार्थियों का आधारभूत स्तर: आरटीई (RTE) के तहत पिछली कक्षाओं में 'जनरल प्रमोशन' या मूल्यांकन की उदार नीति के कारण हाई स्कूल तक आते-आते कई विद्यार्थियों का बुनियादी शैक्षणिक स्तर (पढ़ना-लिखना) अत्यंत कमजोर होता है।
अभिभावकों की उदासीनता: ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पालकों का अपने बच्चों की पढ़ाई के प्रति अपेक्षित जुड़ाव नहीं रहता है पालक-शिक्षक बैठक (PTM) में अनुपस्थिति इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
नियमित उपस्थिति का अभाव: शासन की विभिन्न योजनाओं के बावजूद विद्यार्थियों की शाला में उपस्थिति संतोषजनक नहीं रहती। अनियमित उपस्थिति के कारण पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद भी छात्र परीक्षा के लिए तैयार नहीं हो पाते।
संसाधनों की कमी: कई विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों के रिक्त पद और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ भी अध्यापन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।