जशपुर में सादरी साहित्य भवन की उठी मांग, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल को सौंपा गया ज्ञापन, रामप्रताप सिंह ने भी किया समर्थन, भाषा संरक्षण और साहित्यिक गतिविधियों के लिए स्थायी केंद्र की मांग।

DEEPAK VERMA KUNKURI -- 21/06/2026

जशपुर में सादरी साहित्य भवन की उठी मांग, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल को सौंपा गया ज्ञापन
रामप्रताप सिंह ने भी किया समर्थन, भाषा संरक्षण और साहित्यिक गतिविधियों के लिए स्थायी केंद्र की मांग

जशपुर। जशपुर जिले की संपर्क बोली सादरी के संरक्षण, संवर्धन एवं साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले के साहित्यकारों, शोधकर्ताओं एवं भाषा प्रेमियों ने संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर जशपुर में सादरी साहित्य भवन की स्थापना की मांग की है। 

ज्ञापन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सौंपा गया।


ज्ञापन सौंपने वालों में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक मुकेश कुमार, शोधकर्ता जयेश सौरभ टोपनो, शिक्षाविद् डी.डी. स्वर्णकार सहित जिले के अनेक साहित्यकार, लेखक एवं भाषा प्रेमी शामिल रहे।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह ने भी संस्कृति मंत्री को जशपुर अंचल की भाषाई एवं साहित्यिक विशेषताओं से अवगत कराते हुए सादरी साहित्य भवन की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जशपुर की पहचान उसकी विविध भाषाओं, लोकसंस्कृति और साहित्यिक परंपराओं से है, जिसके संरक्षण एवं विकास के लिए एक साहित्य भवन की स्थापना महत्वपूर्ण होगी।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि जशपुर जिला अपनी बहुभाषी परंपरा के लिए जाना जाता है तथा यहां सादरी भाषा विभिन्न समुदायों के मध्य संवाद की प्रमुख संपर्क बोली के रूप में प्रचलित है। सादरी भाषा में लोकगीत, लोककथाएं, कहावतें, लोकज्ञान एवं समृद्ध वाचिक साहित्य की परंपरा आज भी जीवित है। हालांकि सादरी साहित्य का बड़ा हिस्सा अभी भी मौखिक परंपरा में संरक्षित है, जिसके संकलन, दस्तावेजीकरण, अध्ययन एवं शोध की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
ज्ञापन में बताया गया कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग राज्य की राजभाषा छत्तीसगढ़ी के साथ-साथ सादरी, कुड़ुख तथा अन्य स्थानीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रोत्साहन की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। आयोग से जुड़े साहित्यकार एवं भाषा विशेषज्ञ इन भाषाओं की वाचिक परंपराओं, लोकसाहित्य एवं भाषाई धरोहरों के संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। ऐसे में जशपुर में सादरी साहित्य भवन की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
साहित्यकारों ने ज्ञापन में कहा कि सादरी साहित्य भवन की स्थापना होने से साहित्यकारों, लेखकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, लोककलाकारों एवं भाषा प्रेमियों को एक स्थायी मंच उपलब्ध होगा। यहां साहित्यिक गोष्ठियों, संगोष्ठियों, शोध कार्यों, पुस्तक विमोचन समारोहों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा विभिन्न साहित्यिक आयोजनों का नियमित संचालन किया जा सकेगा। इससे सादरी भाषा एवं साहित्य के विकास को नई दिशा मिलेगी तथा युवा पीढ़ी को अपनी भाषाई विरासत से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा एवं स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। वर्तमान में विद्यालयों में स्थानीय भाषाओं के अध्ययन-अध्यापन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में सादरी साहित्य भवन की स्थापना स्थानीय भाषा के अध्ययन, शोध, प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ज्ञापन सौंपने वालों ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य शासन जशपुर जिले की भाषाई पहचान तथा सादरी भाषा के महत्व को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगा। उनका कहना है कि सादरी साहित्य भवन की स्थापना न केवल साहित्यकारों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी, बल्कि जशपुर जिले के साहित्यिक विकास को भी नई दिशा प्रदान करेगी।

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