कुनकुरी चावल घोटाले में बड़ा अपडेट: 20 साल बाद कोर्ट में पहुंचा चालान, 40 हजार पन्नों का दस्तावेज और 92 गवाह!

कुनकुरी चावल घोटाले में बड़ा अपडेट: 20 साल बाद कोर्ट में पहुंचा चालान, 40 हजार पन्नों का दस्तावेज और 92 गवाह!


जशपुर/कुनकुरी। जशपुर जिले से बड़ी खबर सामने आई है जहां करीब दो दशक से लंबित बहुचर्चित कुनकुरी चावल घोटाला मामले में आखिरकार जांच एजेंसी ने न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन (चालान) पेश कर दिया है। 6 अगस्त 2026 को चालान तैयार किया गया और 14 अगस्त 2026 को विशेष न्यायालय, जशपुर के समक्ष पेश किया गया। लगभग 20 साल पुराने इस मामले में करीब 40 हजार पन्नों के दस्तावेज और 92 गवाहों की सूची न्यायालय के सामने रखी गई है।

मामले में आरोपी सुनील कुमार निगम और विमल कुमार गर्ग के विरुद्ध विवेचना पूरी होने के बाद चालान पेश किया गया है। वहीं एक अन्य आरोपी शिव शंकर वैष्णव की वर्ष 2009 में मृत्यु हो चुकी है।

2005 में दर्ज हुई थी FIR

कुनकुरी स्थित शासकीय खाद्यान्न गोदाम में चावल के स्टॉक में कथित अनियमितता और कमी को लेकर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में FIR क्रमांक 01/2005, दिनांक 30 सितंबर 2005 दर्ज की गई थी।

विवेचना में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409, 420, 467, 468 एवं 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध का उल्लेख किया गया है।

22 हजार क्विंटल से ज्यादा चावल की कमी का उल्लेख

जांच के दौरान कुनकुरी गोदाम के रजिस्टर, स्टॉक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। प्राथमिक जांच में 26,626.42 क्विंटल चावल की कमी सामने आने की बात कही गई थी।

बाद में संयुक्त जांच और भौतिक सत्यापन के आधार पर अंतिम विवेचना में 22,198.52 क्विंटल चावल की वास्तविक कमी का उल्लेख किया गया है। जांच दस्तावेजों में इस कमी से शासन को आर्थिक क्षति होने की बात कही गई है।

2 लाख क्विंटल से ज्यादा चावल की आवक-जावक भी जांच के दायरे में

जांच के दौरान 1 अप्रैल 2004 से 10 सितंबर 2005 तक कुनकुरी प्रदाय केंद्र एवं गोदाम में चावल की आवक-जावक से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। दस्तावेजों के अनुसार इस अवधि में एलआरटी और कस्टम मिलिंग राइस के माध्यम से करीब 2,07,411.04 क्विंटल चावल जमा किए जाने का रिकॉर्ड मिला।

इसके अलावा बीपीएल, एपीएल, अंत्योदय, अन्नपूर्णा, मध्यान्ह भोजन, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम और सूखा राहत योजना समेत विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हुए चावल वितरण के रिकॉर्ड की भी जांच की गई।

आरोपियों की भूमिका का भी किया गया उल्लेख

अंतिम विवेचना में सुनील कुमार निगम, शिव शंकर वैष्णव और विमल कुमार गर्ग की भूमिका का उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार वास्तविक स्थिति से अलग दस्तावेज और अभिलेख तैयार अथवा संधारित कर उनके उपयोग किए जाने की बात सामने आई।

विवेचना में सुनील कुमार निगम एवं शिव शंकर वैष्णव को गोदाम के खाद्यान्न स्टॉक पर पद के अनुसार नियंत्रण एवं महत्वपूर्ण भूमिका में बताया गया है। वहीं विमल कुमार गर्ग के संबंध में 18 डिलीवरी ऑर्डरों से जुड़े 310.13 क्विंटल चावल के परिवहन एवं कथित वितरण का उल्लेख किया गया है।

2006 में गिरफ्तारी, दो आरोपी अब तक जमानत पर

मामले में सुनील कुमार निगम को 29 अगस्त 2006 और विमल कुमार गर्ग को 10 अक्टूबर 2006 को गिरफ्तार किए जाने का उल्लेख है। दोनों आरोपी न्यायालय के आदेशानुसार जमानत पर हैं।

वहीं तीसरे आरोपी शिव शंकर वैष्णव की 1 सितंबर 2009 को मृत्यु हो चुकी है। उनके मृत्यु प्रमाणपत्र सहित संबंधित दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं।

40 हजार पन्ने, 92 गवाह और अब न्यायालय की बारी

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता जय नारायण प्रसाद के अनुसार दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी वर्ष 2006 में हुई थी और वे न्यायालय के आदेश पर जमानत पर हैं। करीब 20 साल बाद लगभग 40 हजार पन्नों के दस्तावेज और 92 गवाहों की सूची के साथ चालान विशेष न्यायालय जशपुर में पेश किया गया है।

अब इस बहुचर्चित मामले में आगे की न्यायालयीन प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच एजेंसी के आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगी। मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।

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