दुलदुला में नर हाथी की संदिग्ध मौत से हड़कंप, पीठ-सूंड पर चोट के निशान!वन विभाग की ट्रैकिंग पर सवाल—रिकॉर्ड में ‘शून्य’ मौजूदगी, उसी रेंज में मिला 15 वर्षीय हाथी का शव।

दुलदुला में नर हाथी की संदिग्ध मौत से हड़कंप, पीठ-सूंड पर चोट के निशान! वन विभाग की ट्रैकिंग पर सवाल—रिकॉर्ड में ‘शून्य’ मौजूदगी, उसी रेंज में मिला 15 वर्षीय हाथी का शव।

जशपुर/दुलदुला :- जशपुर जिले के दुलदुला वन परिक्षेत्र के नोनपानी जंगल (रिजर्व फॉरेस्ट-737) में करीब 15 वर्षीय नर हाथी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया है। गुरुवार सुबह खेत मालिक गणेश राम ने जंगल में हाथी का शव देखा और तत्काल वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही डीएफओ शशिकुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल को घेराबंदी कर सुरक्षित कर दिया गया। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल पर आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए मौके पर बुलाया गया है।

पीठ और सूंड पर चोट के निशान, शिकार की आशंका से जांच तेज

मृत हाथी के शरीर, खासकर पीठ और सूंड पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई है। इसी क्षेत्र में पूर्व में जंगली सूअर के शिकार की घटनाएं सामने आने के कारण अब हाथी की मौत को लेकर भी शिकार की आशंका समेत हर पहलू से जांच की जा रही है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

डीएफओ शशिकुमार के अनुसार, गोड़अम्बा के नोनपानी जंगल में करीब 15 वर्षीय नर हाथी का शव मिला है। मौत के सटीक कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद चलेगा और फिलहाल सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है।

जिस रेंज में हाथी की हुई है मौत, विभागीय रिकॉर्ड में हाथियों की मौजूदगी ‘शून्य’!

इस घटना ने वन विभाग की हाथी मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग की गुरुवार की रिपोर्ट के मुताबिक दुलदुला रेंज में हाथियों की मौजूदगी दर्ज नहीं थी, जबकि इसी रेंज में नर हाथी का शव बरामद हुआ है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार पत्थलगांव रेंज में 30 हाथी,
कुनकुरी में 1, तपकरा में 3, बगीचा में 1 और कांसाबेल में 1 हाथी की मौजूदगी दर्ज की गई थी। इस तरह जिले में कुल 36 हाथियों की मौजूदगी बताई गई थी। ऐसे में दुलदुला रेंज में हाथी की मौजूदगी रिकॉर्ड में नहीं होना और उसी क्षेत्र में एक नर हाथी की संदिग्ध मौत सामने आना मॉनिटरिंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हादसा, बीमारी या शिकार? जांच के बाद खुलेगा मौत का राज

फिलहाल वन विभाग ने घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी है। फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हाथी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, किसी हादसे में हुई या इसके पीछे शिकार जैसी आपराधिक गतिविधि का हाथ है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस हाथी की विभागीय ट्रैकिंग में मौजूदगी दर्ज नहीं थी, वह दुलदुला के जंगल तक कब और कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई? जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।

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