कुनकुरी। अब कुनकुरी विकासखंड के प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की घर की भाषा सादरी उनकी पढ़ाई की ताकत बनेगी। बच्चों को शुरुआती शिक्षा उनकी परिचित मातृभाषा में देने के उद्देश्य से ‘नींव’ बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है। जशपुर जिले के कुनकुरी और बगीचा विकासखंड के कुल 202 विद्यालयों में यह कार्यक्रम संचालित किया जाएगा, जिसमें अकेले कुनकुरी विकासखंड के 16 संकुलों के 83 विद्यालय शामिल हैं।

कार्यक्रम के तहत कक्षा 1 और 2 के बच्चों को उनकी परिचित घरेलू भाषा सादरी के माध्यम से सीखने के अवसर दिए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ घर की भाषा और विद्यालय की भाषा के बीच की दूरी को कम करना है।

20 से 25 अगस्त तक शिक्षकों का प्रशिक्षण

कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए कुनकुरी में 20 से 25 अगस्त तक शिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के लिए दो बैच संचालित किए जा रहे हैं। पहला बैच शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कुनकुरी और दूसरा बैच स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, सलियाटोली में आयोजित हो रहा है।

दोनों प्रशिक्षण केंद्रों पर लगभग 41-42 शिक्षकों के बैच में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कहानी, कविता और स्थानीय भाषा से होगी पढ़ाई

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बहुभाषी कक्षा में बच्चों से संवाद, मातृभाषा के उपयोग, मौखिक भाषा विकास, कहानी, कविता, चित्र और स्थानीय संदर्भ आधारित शिक्षण गतिविधियों की जानकारी दी जा रही है।
शिक्षकों को यह भी बताया जा रहा है कि बच्चों को उनकी परिचित घरेलू भाषा से धीरे-धीरे विद्यालय की भाषा की ओर सहज तरीके से कैसे ले जाया जाए।

स्थानीय भाषा और संस्कृति को मिलेगा महत्व

‘नींव’ कार्यक्रम में स्थानीय भाषाई और सांस्कृतिक परिवेश को विशेष महत्व दिया जाएगा। बच्चों के लिए स्थानीय संदर्भ से जुड़ी कहानियां, गीत, कविताएं, चित्र और अन्य शिक्षण-अधिगम सामग्री का उपयोग किया जाएगा।
इससे बच्चे अपने घर और समुदाय में जिस भाषा में सहजता से संवाद करते हैं, उसी भाषा के माध्यम से विद्यालय में सीखने की प्रक्रिया से जुड़ सकेंगे।

सादरी बनेगी सीखने की सीढ़ी

बहुभाषी शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाना नहीं, बल्कि घर की भाषा को बच्चों की सीखने की ताकत बनाना है। जब बच्चा अपनी परिचित भाषा में आसानी से अपने विचार व्यक्त कर पाता है, कहानी समझता है और शिक्षक से संवाद करता है, तो उसके लिए विद्यालय की भाषा को सीखना भी अपेक्षाकृत सहज हो जाता है।
कुनकुरी क्षेत्र में सादरी भाषा के व्यापक प्रयोग को देखते हुए कार्यक्रम में स्थानीय भाषाई एवं सांस्कृतिक संदर्भों को प्राथमिकता दी जा रही है।

बच्चों की भाषा, समझ और अभिव्यक्ति होगी मजबूत।

शिक्षकों के प्रशिक्षण के बाद विद्यालय स्तर पर इन गतिविधियों का नियमित संचालन किया जाएगा। इससे बच्चों की मौखिक भाषा, समझ, अभिव्यक्ति और प्रारंभिक पढ़ने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यह पहल बच्चों को उनकी अपनी भाषा से जोड़ते हुए उन्हें धीरे-धीरे विद्यालय की भाषा में सीखने के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

जिला स्त्रोत समूह और लेंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन ने दिया प्रशिक्षण।

इस प्रशिक्षण को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा चयनित जिला स्त्रोत समूह के सदस्यों तथा लेंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया जा रहा है।
खास बात: जशपुर जिले में ‘नींव’ कार्यक्रम के माध्यम से कुल 202 विद्यालयों में बहुभाषी शिक्षा की पहल की जा रही है, जबकि कुनकुरी विकासखंड के 83 विद्यालयों में सादरी भाषा को बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ने की तैयारी है।