कुनकुरी/जशपुर, 25 अगस्त 2026।
जशपुर जिले के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में कॉफी उत्पादन की संभावनाओं को तलाशने और किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित करने की दिशा में उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसी क्रम में ग्राम ढोढीडांड में एक दिवसीय कॉफी पौधरोपण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. जानसन लकड़ा के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY), छत्तीसगढ़ शासन तथा महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग के सहयोग से किया गया। इस पहल का उद्देश्य उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में वानिकी एवं फलदार वृक्षों पर आधारित कॉफी उत्पादन का मॉडल विकसित करना और किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाओं को बढ़ावा देना है।
विद्यार्थियों ने सीखी कॉफी उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक
प्रशिक्षण के दौरान उद्यानिकी महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. दीपक कुमार जायसवाल ने विद्यार्थियों को कॉफी पौधों के वैज्ञानिक रोपण की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने उपयुक्त स्थान का चयन, गड्ढे की तैयारी, पौधों के बीच उचित दूरी, रोपण की विधि तथा शुरुआती अवस्था में पौधों की देखभाल के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाया।
वहीं डॉ. दयासागर, डॉ. नीरज जायसवाल एवं रवि ने कॉफी पौधों में विभिन्न अवस्थाओं के दौरान होने वाले रोग एवं कीट प्रबंधन, पोषक तत्वों की आवश्यकता, पौधों की देखभाल और उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विद्यार्थियों को व्यावहारिक जानकारी दी।

पौधे रोपकर विद्यार्थियों ने समझी जमीनी तकनीक
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने स्वयं कॉफी पौधों का रोपण किया और वैज्ञानिक विधि से कॉफी उत्पादन की तकनीक को व्यवहारिक रूप से समझा। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ स्थानीय कृषक भी शामिल हुए।
कॉफी के साथ मसालों और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की तैयारी
उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी के अधिष्ठाता डॉ. जानसन लकड़ा ने कहा कि कॉफी उत्पादन मॉडल के माध्यम से क्षेत्र की जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वानिकी एवं फलदार वृक्षों के साथ-साथ मसालों के उत्पादन को बढ़ावा देने और भविष्य में कॉफी प्रसंस्करण की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।
दीर्घकालिक आमदनी और रोजगार की उम्मीद

प्राध्यापक डॉ. दीपक कुमार जायसवाल ने कहा कि वानिकी आधारित कॉफी मॉडल भविष्य में किसानों के लिए दीर्घकालिक आमदनी और अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। इसके साथ ही इससे स्थानीय रोजगार, मृदा संरक्षण और वन सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीरज जायसवाल ने किया। उद्यानिकी महाविद्यालय की यह पहल जशपुर के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में कॉफी उत्पादन की संभावनाओं को वैज्ञानिक तरीके से परखने और किसानों को पारंपरिक खेती के साथ एक नए लाभकारी विकल्प से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।