फरसाबहार में शिक्षा विभाग पर संगीन सवाल! BEO-ABEO-BRCC के खिलाफ शिक्षकों ने खोला मोर्चा, CM से मांगी निष्पक्ष जांच। आर्थिक शोषण से मानसिक प्रताड़ना तक के आरोप; निरीक्षण, निलंबन और तबादले का डर दिखाने की शिकायत। ACB से की जांच की मांग।


फरसाबहार/जशपुर। 

जशपुर जिले से बड़ी खबर निकलकर सामने आई है जहां फरसाबहार विकासखंड में शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन, फरसाबहार ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) एवं बीआरसीसी (BRCC) के खिलाफ शिक्षकों से प्राप्त शिकायतों को आधार बनाते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।

वहीं फेडरेशन ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कलेक्टर को भी शिकायत पत्र दिया है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा पद एवं अधिकारों का कथित दुरुपयोग करते हुए शिक्षकों को निरीक्षण, निलंबन, प्रतिकूल प्रतिवेदन, विभागीय कार्रवाई और स्थानांतरण का भय दिखाकर मानसिक एवं आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

शिक्षकों से रकम मांगने के आरोपों ने बढ़ाई सनसनी

ज्ञापन के साथ संलग्न शिकायतों में शिक्षकों से अलग-अलग कार्यों के नाम पर कथित रूप से आर्थिक लाभ मांगे जाने का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज में ₹50 हजार, ₹60 हजार, ₹20 हजार से लेकर ₹01 लाख तक की राशि मांगे जाने के आरोपों का भी जिक्र है।

फेडरेशन ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अनियमितता एवं भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की ACB अथवा अन्य सक्षम जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

सरकारी काम के नाम पर अनुचित लाभ मांगने का आरोप

शिकायतों में कथित तौर पर शासकीय कार्यों को प्रभावित करने, निलंबन समाप्त कराने, निरीक्षण प्रतिवेदन अनुकूल कराने, PFMS भुगतान सहित अन्य विभागीय कार्यों के नाम पर शिक्षकों से अनुचित आर्थिक लाभ मांगने के आरोपों का उल्लेख किया गया है।

फेडरेशन का कहना है कि यदि ऐसी शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह न केवल शिक्षकों के अधिकारों से जुड़ा मामला है, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

CM के सामने रखीं 6 बड़ी मांगें

फेडरेशन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि—

1. BEO, ABEO एवं BRCC के खिलाफ प्राप्त सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए।

2. जांच अवधि में संबंधित अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों से पृथक किया जाए।

3. शिकायतकर्ताओं को किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया जाए।

4. आर्थिक अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के आरोपों की ACB अथवा सक्षम एजेंसी से जांच कराई जाए।

5. आरोप सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए।

6. भविष्य में शिक्षकों के कथित शोषण और भ्रष्टाचार की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी शिकायत निवारण एवं निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।

अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फेडरेशन ने मुख्यमंत्री से मामले में पारदर्शी, निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई है। ज्ञापन में संगठन के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं। 
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन गंभीर आरोपों पर प्रशासन कब और किस स्तर की जांच शुरू करता है।
फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। 

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