तमिलनाडु की तर्ज पर छत्तीसगढ़ से भी TET की स्थायी मुक्ति की मांग, शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार के सामने रखा प्रस्ताव।
17 अगस्त 2012 तक नियुक्त शिक्षकों को TET से पूरी छूट देने की मांग, विभागीय सीमित TET परीक्षा कराने का सुझाव।
छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर शिक्षकों के बीच हलचल तेज हो गई है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सेवाकालीन शिक्षकों को TET अर्हता प्राप्त करने के लिए समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखी हैं।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश के शिक्षक नई नौकरी पाने के लिए TET परीक्षा नहीं दे रहे हैं, बल्कि वे पहले से ही सेवाकालीन शिक्षक हैं। उन्हें दक्ष और योग्य बनाए जाने के उद्देश्य से शिक्षक पात्रता परीक्षा की व्यवस्था में शामिल किया जा रहा है। ऐसे में अनुभवी शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार को व्यावहारिक और सरल व्यवस्था बनानी चाहिए।
तमिलनाडु की तर्ज पर TET से स्थायी मुक्ति की मांग
संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे एवं केदार जैन ने कहा कि 17 अगस्त 2012 तक छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता नहीं थी। इसलिए इस अवधि से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से पूरी तरह छूट दी जानी चाहिए। मोर्चा ने मांग की है कि तमिलनाडु की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे, ताकि प्रदेश के सेवाकालीन शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से स्थायी मुक्ति मिल सके। मोर्चा का कहना है कि इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार द्वारा निश्चित रूप से विचार किया जा सकता है।
शिक्षा मंत्री से हुई चर्चा पर जताया भरोसा
मोर्चा ने बताया कि शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के साथ हुई चर्चा में शिक्षकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत हुई है। संगठन ने शिक्षा मंत्री के समक्ष पांच सूत्रीय मांगें रखी थीं, जिनमें TET के झंझट से स्थायी मुक्ति, पूर्व सेवा की गणना कर हितलाभ, केंद्रीय वेतनमान देकर वेतन विसंगति दूर करना, D.Ed.धारी शिक्षकों के लिए B.Ed. हेतु ब्रिज कोर्स की व्यवस्था तथा भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त अथवा संशोधित करने की मांग प्रमुख रही।
संजय शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंत्री के साथ हुई चर्चा पर प्रदेश के शिक्षकों को पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि सरकार सेवाकालीन शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
विभागीय सीमित TET का सुझाव
मोर्चा का कहना है कि यदि TET की अनिवार्यता से तत्काल स्थायी मुक्ति संभव नहीं होती है, तो अनुभवी एवं सेवाकालीन शिक्षकों के लिए अलग से “विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा” आयोजित की जानी चाहिए।
संगठन ने सुझाव दिया है कि परीक्षा को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए तथा शिक्षकों को पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाएं। साथ ही TET का वार्षिक कैलेंडर जारी कर वर्ष में कम से कम तीन बार परीक्षा आयोजित करने की मांग की गई है।
33 प्रतिशत उत्तीर्णांक और 100 प्रश्नों का प्रस्ताव
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने विभागीय TET के लिए विस्तृत प्रारूप भी सुझाया है। इसके तहत पेपर-I और पेपर-II आयोजित करने, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक स्तर के लिए परीक्षा कराने तथा परीक्षा को ऑफलाइन OMR आधारित रखने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के अनुसार परीक्षा में 100 बहुविकल्पीय प्रश्न, प्रत्येक एक अंक का तथा परीक्षा की अवधि 3 घंटे रखी जाए। सेवाकालीन शिक्षकों की परिस्थितियों को देखते हुए न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 प्रतिशत निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।
संगठन ने यह भी मांग की है कि परीक्षा का पाठ्यक्रम कक्षा 1 से 5 तथा कक्षा 6 से 8 के राज्य पाठ्यक्रम, सामान्य शैक्षणिक समझ और अवधारणाओं पर आधारित हो। दोनों स्तरों की परीक्षाओं के बीच कम से कम 15 दिन का अंतर रखा जाए तथा परीक्षा की तैयारी के लिए शिक्षकों को पहले से मॉड्यूल उपलब्ध कराया जाए।
विकासखंड स्तर पर हों परीक्षा केंद्र
मोर्चा ने परीक्षा केंद्रों को विकासखंड स्तर पर स्थापित करने का सुझाव दिया है। इसके लिए केवल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने की बात कही गई है, ताकि सेवाकालीन शिक्षकों को परीक्षा देने में अनावश्यक परेशानी न हो। संगठन ने स्पष्ट किया है कि विभागीय TET की व्यवस्था का उद्देश्य अनुभवी शिक्षकों को बाहर करना नहीं, बल्कि उन्हें न्यायिक एवं वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पात्र बनाते हुए उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए TET से स्थायी मुक्ति के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए और आवश्यकता होने पर सेवाकालीन शिक्षकों के लिए पृथक विभागीय TET का आयोजन शीघ्र कराया जाए।