कुनकुरी में कॉलेज निर्माण पर उठे गंभीर सवाल: अमानक सामग्री के आरोप, बिना सूचना बोर्ड लगाए चल रहा काम।

कुनकुरी - कुनकुरी विकासखंड में निर्माणाधीन नर्सिंग एवं फिजियोथेरेपी कॉलेज की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चरईडांड स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर के पास करंजटोली स्कूल के समीप चल रहे निर्माण कार्य में कथित तौर पर अमानक सामग्री के इस्तेमाल और ड्राइंग-डिजाइन के विपरीत काम किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

न सूचना बोर्ड, न प्रोजेक्ट की जानकारी

मिडिया की टीम के द्वारा निर्माण स्थल पर निरीक्षण के दौरान मौके पर कोई स्पष्ट सूचना बोर्ड नजर नहीं आया। ऐसे में प्रोजेक्ट की लागत, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा जैसी बुनियादी जानकारियां सार्वजनिक नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच मौके पर काम कर रहे मजदूरों को भी निर्माण की पूरी जानकारी नहीं होना बताया।

वहीं 'विजय इंफ्रा' के साइट इंजीनियर बिकु कुमार राणा से निर्माण लागत और अन्य जानकारी को लेकर सवाल किए जाने पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।

रेत में डस्ट,मिट्टी, जंग लगी सरिया ने बढ़ाई चिंता

मौके पर निर्माण में इस्तेमाल हो रही रेत में मिट्टी की मात्रा दिखाई देने का दावा किया गया। वहीं गिट्टी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे। इसके अलावा निर्माण स्थल पर जंग लगी सरिया के इस्तेमाल को लेकर भी आपत्ति सामने आई।

सबसे गंभीर सवाल बेस लेवल की सरिया की दूरी को लेकर है। मौके पर दावा किया गया कि ड्राइंग-डिजाइन के अनुसार जहां करीब 4.5 इंच की दूरी होनी चाहिए, वहां सरिया करीब 7 से 8 इंच की दूरी पर बांधी जा रही है। यदि यह स्थिति तकनीकी जांच में सही पाई जाती है, तो निर्माण की संरचनात्मक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

निरीक्षण के बावजूद सवाल बरकरार

बताया जा रहा है कि निर्माण स्थल का निरीक्षण करने अंबिकापुर से एसडीओ और इंजीनियरों की टीम भी पहुंच चुकी थी। इसके बावजूद यदि निर्माण सामग्री और सरिया की गुणवत्ता में खामियां हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

निरीक्षण के दौरान इन पहलुओं की जांच किस स्तर तक की गई?

क्या निर्माण कार्य की नियमित तकनीकी जांच हो रही है?क्या इस्तेमाल हो रही सामग्री के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता जांची गई है?

क्या ड्राइंग-डिजाइन के मुताबिक सरिया की दूरी और स्ट्रक्चर की जांच की गई है?

कुनकुरी विकासखंड में हो रहे इस सरकारी निर्माण को लेकर उठे सवाल अब सिर्फ एक भवन तक सीमित नहीं हैं। मामला सीधे तौर पर सरकारी धन, निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा है।

जरूरत है कि संबंधित विभाग पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और रेत, गिट्टी, सीमेंट व सरिया की गुणवत्ता के साथ-साथ ड्राइंग-डिजाइन के अनुपालन की भी जांच करे। जांच में यदि कोई अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

बहरहाल अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह विधान सभा क्षेत्र में करोड़ों रुपए के निर्माणाधीन कार्यों में उठे सवालों का जिम्मेदार विभागीय अधिकारी जवाब देंगे, या फिर इसे अनदेखा कर दिया जाएगा।

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