पीएम विकास एवं कौशल से अवसर योजना: अल्पसंख्यक समुदायों के लिए नए अवसर
नई दिल्ली : कई परिवारों के लिए आर्थिक प्रगति की शुरुआत बड़ी पूंजी या ऊँची तनख्वाह वाली नौकरी से नहीं, बल्कि किसी कौशल, छोटे अवसर या सरकारी सहायता की सही जानकारी से होती है। यह विशेष रूप से कारीगरों, स्कूल छोड़ चुके युवाओं, महिलाओं, पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े लोगों तथा ऐसे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें प्रतिभा तो है, लेकिन औपचारिक अवसरों तक पहुँच सीमित है।
भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (PM VIKAS) योजना का उद्देश्य अधिसूचित छह अल्पसंख्यक समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। इसके अंतर्गत कौशल विकास, उद्यमिता, शिक्षा सहायता, महिला नेतृत्व तथा पारंपरिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया गया है।
पीएम विकास योजना की प्रमुख विशेषताएँ
PM VIKAS के अंतर्गत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की पहले की पाँच योजनाओं—सीखो और कमाओ, उस्ताद, हमारी धरोहर, नई रोशनी और नई मंजिल—को एकीकृत किया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न आवश्यकताओं को एक साथ संबोधित करना है। उदाहरण के लिए, किसी युवा को शिक्षा के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है, जबकि किसी कारीगर को बेहतर कौशल के साथ बाजार और ऋण की सुविधा की जरूरत हो सकती है।
कौशल से अवसर तक
योजना का महत्वपूर्ण विचार “कौशल से अवसर तक” है। केवल प्रशिक्षण प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है; कौशल ऐसा होना चाहिए जिससे व्यक्ति रोजगार प्राप्त कर सके, अपना व्यवसाय शुरू कर सके, आय बढ़ा सके और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके।
पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए प्रशिक्षण के माध्यम से उनके मौजूदा कौशल को बेहतर बनाने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने, बाजार की मांग समझने और नए बाजारों तक पहुँच बनाने में सहायता की जा सकती है।
ऋण और बाजार से जुड़ाव
PM VIKAS के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए नेशनल माइनॉरिटीज डेवलपमेंट एंड फाइनेंस कॉरपोरेशन (NMDFC) की योजनाओं के साथ ऋण संबंधी जुड़ाव का भी उल्लेख किया गया है। इससे उन लोगों को सहायता मिल सकती है जिन्होंने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, लेकिन उद्यम शुरू करने या उसका विस्तार करने के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं है।
अर्थात् प्रशिक्षण व्यक्ति को कौशल देता है और ऋण उस कौशल को व्यावसायिक गतिविधि में बदलने का साधन उपलब्ध करा सकता है।
डिजिटल जागरूकता
आज आर्थिक अवसर तेजी से डिजिटल माध्यमों से जुड़े हैं। किसी व्यक्ति के पास अच्छा सिलाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण या अन्य व्यावसायिक कौशल हो सकता है, लेकिन डिजिटल जानकारी के अभाव में उसे ग्राहक खोजने, डिजिटल भुगतान करने, अपने उत्पादों का प्रचार करने या सरकारी सेवाओं तक पहुँचने में कठिनाई हो सकती है।
इसी संदर्भ में Skill India Digital Hub जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म कौशल, शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जुड़ने में सहायता कर सकते हैं।
महिलाओं के लिए अवसर
PM VIKAS में अल्पसंख्यक महिलाओं के नेतृत्व एवं उद्यमिता विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सिलाई, कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य गतिविधियों से जुड़ी महिलाओं को उद्यमिता, वित्तीय प्रबंधन और नेतृत्व संबंधी प्रशिक्षण देकर उनकी आय-सृजन क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रभाव परिवार की शिक्षा, पोषण और जीवन-स्तर पर भी पड़ सकता है।
स्कूल छोड़ चुके युवाओं के लिए दूसरी संभावना
योजना में स्कूल छोड़ चुके युवाओं के लिए शिक्षा एवं कौशल सहायता का प्रावधान भी बताया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे युवाओं को दोबारा शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के रास्ते से जोड़ना है, जिन्होंने गरीबी, पारिवारिक परिस्थितियों या अन्य कठिनाइयों के कारण पढ़ाई छोड़ दी है।
PM VIKAS और “कौशल से अवसर तक” की अवधारणा
कल्याणकारी सहायता से आगे बढ़कर कौशल, शिक्षा, उद्यमिता, डिजिटल जागरूकता, ऋण और बाजार तक पहुँच को एक साथ जोड़ने का प्रयास प्रस्तुत करती है। इसका व्यापक उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक अवसरों से जोड़ना तथा उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करना है।